Monday , 10 December 2018
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1 अप्रैल से आरबीआई लागू करने जा रही ये बड़ा नियम

ब्याज दरों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से इंडियन रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले वर्ष 1 अप्रैल से एक नया नियम लागू करने जा रही है. इसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने पर्सलन, होम  सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (एमएसई) पर लगने वाले ब्याज को बैंकों की बजाय सीधे भारतीय रिजर्व बैंक पर निर्भर कर दिया है.

इसका मतलब है कि अब भारतीय रिजर्व बैंक के ब्याज दरों पर निर्णय करते ही बैंकों को भी इस पर निर्णय लेना होगा. भारतीय रिजर्व बैंक की दरें घटते ही बैंक आपकी ईएमआई घटा देंगे. इससे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को मिलने की राह में पारदर्शिता आएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट घटाए जाने के बावजूद बैंक अपने महंगे फंड का हवाला देते हुए ब्याज दरों में कटौती अपेक्षित तरीके से नहीं किया करते थे.

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हालांकि, 1 अप्रैल 2019 से उन्हें एक्सटर्नल बेंचमार्किंग सिस्टम को मानना होगा. इससे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर घटने या बढ़ने का लाभ लोन लेने वालों को जल्द मिलेगा.भारतीय रिजर्व बैंक ने डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी पॉलिसीज के बयान में बोला कि ब्याज दरों को एक्सटर्नल बेंचमार्क्स से जोड़ने का आखिरी दिशानिर्देश इस महीने के अंत में जारी होगा.

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