Friday , 24 May 2019
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हितों के विवाद मुद्दे में फंसे इन दो खिलाड़ियों के पास बचा सिर्फ 1 वर्ष

भारतीय क्रिकेट के महान सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar)  वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) हितों के विवाद मुद्दे में मंगलवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के लोकपाल डीके जैन के सामने पेश हुए ये दोनों क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) के मेम्बर रहते हुए भारतीय टी20 लीग (आईपीएल) की फ्रेंचाइजी के मेंटॉर भी हैंइसी कारण हितों के विवाद का यह टकराव पैदा हो गया है इस मुद्दे में 20 कई को भी सुनवाई हो सकती है 

बोर्ड के नए संविधान के अस्तित्व में आने के बाद सचिन, लक्ष्मण  सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) बोर्ड की किसी भी समिति का भाग बनने के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे इसका मतलब है कि इन तीनों खिलाड़ियों की सेवाएं पूरी तरह से नहीं ली गईं क्योंकि इन तीनों को सिर्फ भारतीय टीम का मुख्य कोच चुनने के लिए ही नियुक्त किया गया इन तीनों की सीएसी ने 2016  2017 में भारतीय टीम का कोच नियुक्त किया था यहां तक की प्रशासकों की समिति (सीओए) ने महिला टीम के मुख्य कोच को निुयक्त करने को लेकर इन तीनों को ज्यादा समय भी नहीं दिया था

बीसीसीआई के सीनियर ऑफिसर ने बताया कि किस तरह बोर्ड ने भारतीय क्रिकेट के तीन दिग्गजों की सेवाओं को जाया कर दिया ऑफिसर ने कहा, ‘यह बेहद दुख की बात हैवर्तमान परिस्थिति में तीनों को लोकपाल के सामने जाने को विवश कर दिया जहां सीओए लोकपाल से कह सके कि यह तीनों ‘साफ तौर से’ हितों के विवाद के मामले में घिरे हैं सीओए ने भारतीय क्रिकेट के इन तीन दिग्गजों की सेवाओं को पूरी तरह से उपयोग भी नहीं किया ’

इस ऑफिसर ने कहा, ‘नए संविधान के मुताबिक यह तीनों पांच वर्ष के बाद किसी भी समिति का भाग नहीं हो सकते  यह नियम 2020 के बाद इन्हें बाहर कर देगा क्या बोर्ड में जो तंत्र पेशेवर ढंग से कार्य कर रहा है उसे पता है कि उन्हें क्या खोया है? उन्होंने इन तीनों को महिला टीम का कोच नियुक्त करने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया कम देखना बड़ी बीमारी है ’

ऑफिसर ने बोला कि यह जो ‘साफ तौर पर’ हितों के विवाद का मामला है वह सीओए के तरफ से गैरजरूरी है   ऑफिसर ने कहा, ‘वह यह कहने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं सचिन का उदाहरण ले लीजिए क्या उन्हें मुंबई इंडियंस या सीएसी में रहने के लिए बीसीसीआई की तरफ से कोई पैसा मिल रहा है? तो फिर हितों के विवाद का मामला कहां है? साथ ही 2020 के बाद से आप उन्हें किसी भी क्रिकेट समिति में शामिल नहीं कर सकते एक महान जिसने 24 वर्ष 25 सीजनों तक देश के लिए क्रिकेट खेली वह कभी भी चयनकर्ता बनने के लिए योग्य नहीं होगा ’

बीसीसीआई के नए संविधान के मुताबिक, जो शख्स पांच वर्ष तक किसी क्रिकेट समिति का भाग रहा होगा, वह भविष्य में कोई  समिति का भाग नहीं बन पाएगा इस नियम की मानें तो सीएसी जो 2015 में नियुक्त की गई थी, उसके पास सिर्फ एक वर्ष का समय है इसके बाद सचिन, गांगुली  लक्ष्मण किसी भी क्रिकेट समिति का भाग नहीं बन पाएंगे

बुरी बात यह है कि इस तिगड़ी को जब सीएसी के सदस्यों के तौर पर 2015 में चुना गया था तब इन पूर्व खिलाड़ियों को लाने का मकसद यह था कि राष्ट्रीय टीम का प्रदर्शन सुधारा जाए  साथ ही हिंदुस्तान को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ टीम बनाने के लिए रोडमैप तैयार किया जाए, लेकिन बीते चाल वर्ष में इस समिति ने आधिकारिक तौर पर सिर्फ दो कार्य किए हैं- 2016 में अनिल कुंबले को राष्ट्रीय टीम का कोच नियुक्त किया गया उसके बाद जब उनका कार्यकाल खत्म हो गया तो 2017 में फिर रवि शास्त्री को टीम का कोच नियुक्त किया गया दुख की बात यह है कि खेल को लंबे समय तक सेवाएं देने वाले इन दिग्गजों को अब यह साबित करना पड़ रहा है कि यह हितों के विवाद के मुद्दे में नहीं हैं

 

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